नेपाल

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नेपाल
Flag of नेपाल Emblem of नेपाल
ध्वज Emblem
राष्ट्रवाक्य: जननी जन्मभूमिष्च स्वर्गादपि गरीयसी  (संस्कृत)
"मां एवं मातृभूमि स्वर्ग से भी महान होती है"
राष्ट्रगान: सायून थुंगा फूल का
नेपाल की स्थिति
राजधानी काठमांडू
27°42′ N 85°19′ E
सबसे बड़ा शहर राजधानी
राजभाषा(एँ) नेपाली[१]
सरकार
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अंतरिम सरकार
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एकीकरण
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क्षेत्रफल
 - कुल
 
 - जलीय (%)
 
{{{area}}} km² (93वां)
{{{areami²}}} sq mi 
२.८
जनसंख्या
 - जुलाई २००७ अनुमान
 - २००२ जनगणना
 - जनसंख्या का घनत्व
 
२८,९०१,७९० (४० वां)
२३,१५१,४२३
{{{population_density}}}/km² (५६वां)
{{{population_densitymi²}}}/sq mi 
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (पीपीपी)
 - कुल
 - प्रतिव्यत्ति
२००६ estimate
$४८.१८ बिलियन (८७-वां)
$१,५०० (१६४ वां)
मानव विकास संकेतांक (एइचडीआइ) 0.534 (१४२ वां) – medium
मुद्रा रुपया (एनपीआर)
समय मण्डल
 - ग्रीष्म ऋतु (डेलाइट सेविंग टाइम)
नेपाली प्राईम टाईम (UTC+५:४५)
मनाया नहीं जाता (UTC+५:४५)
इंटरनेट टॉप लेवेल डोमेन .एनपी
दूरभाष कोड +९७७


नेपाल, (अन्तरिम संविधान अनुसार आधिकारिक रूप में नेपाल गणराज्य[२]) ([neˈpaːl] ) एक दक्षिण एशियायी भूपरिवेष्ठित हिमालयी राष्ट्र है। नेपाल के उत्तर मे चीन का स्वशासित प्रदेश तिब्बत है और दक्षिण, पूर्व व पश्चिम में भारत अवस्थित है। नेपाल मे ८५ प्रतिशत से ज्यादा नागरिक हिन्दू धर्म में विश्वास रखते है । यह प्रतिशत भारत में हिन्दुओं प्रतिशत से भी अधिक है, अतः नेपाल विश्व का सबसे ज्यादा प्रतिशत हिन्दू धर्मावलम्बी होने वाला राष्ट्र भी है । नेपाल की राजभाषा नेपाली है और नेपाल के लोगों को भी नेपाली कहा जाता है ।

एक छोटे से क्षेत्र के लिए नेपाल की भौगोलिक विविधता बहुत उल्लेखनीय है। यहाँ तराई के उष्म फाँट से लेकर ठण्डे हिमालय की श्रृंखलाएं अवस्थित है। संसार का सबसे ऊँची १४ हिमश्रृंखलाओं मे से आठ नेपाल में हैं जिसमें संसार का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा (एवरेस्ट, नेपाल और चीन की सीमा पर) भी एक है। नेपाल की राजधानी और सबसे बडा शहर काठमाडौं है। काठमाण्डौ उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के शहर भी हैं अन्य प्रमुख शहरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगञ्ज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगञ्ज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है।

आज का नेपाली भूभाग अठारहवीं सदी में गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह द्वारा संगठित नेपाल राज्य का अंशमात्र है । अंग्रेज़ों के साथ हुई सन्धियों में नेपाल के राजा को उस समय (1814) के नेपाली क्षेत्र ब्रिटिश इंडिया को देने पड़े जो आज भी भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा पश्चिम बंगाल के अंश हैं । बींसवीं सदी में प्रारंभ हुए जनतात्रिक आन्दोलनों में कई बार विराम आया जब राजशाही ने जनता और उनके प्रतिनिधियों को अधिकाधिक अधिकार दिए । अंतः २००८ में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि माओवादी नेता प्रचण्ड के प्रधानमंत्री बनने से इस आन्दोलन की समाप्तकि हुई । इससे पहले ही सन् २००६ में राजा के अधिकारों को अत्यंत सीमित कर दिया गया था ।


अनुक्रम

[संपादित करें] नाम

"नेपाल" शब्द की उत्त्पत्ति के बारे मे ठोस प्रमाण कुछ नही है, लेकिन एक प्रसिद्ध विश्वास अनुसार यह शब्द ने ऋषि तथा पाल (गुफा) मिलकर बना है। माना जाता है कि एक समय नेपाल की राजधानी काठमाण्डौ ने ऋषि का तपस्या स्थल था।

[संपादित करें] इतिहास

मुख्य लेख: नेपाल का इतिहास

हिमालय क्षेत्र मे मनुष्यों का आगमन लगभग ९,००० वर्ष पहले होने के तथ्य की पुष्टि काठमाण्डौ उपत्यका में पाये गये नव पाषाण औजारौं से होती है। सम्भवतः तिब्बती-बर्मीज मूल के लोग नेपाल मे २,५०० वर्ष पहले आ चुके थे।[३]

१५०० ईशा पूर्व के आसपास इन्डो-आर्यन जतियों ने काठमाण्डौ उपत्यका में प्रवेश किया । करीब १००० ईसा पूर्व में छोटे-छोटे राज्य और राज्यसंगठन बनें । सिद्धार्थ गौतम (ईसापूर्व ५६३–४८३) शाक्य वंश के राजकुमार थे, जिन्होंने अपना राजकाज त्याग कर तपस्वी का जीवन निर्वाह किया और वह बुद्ध बन गए।

२५० ईशा पुर्व तक ईस क्षेत्र मे उत्तर भारत के मौर्य साम्राज्य का प्रभाव पडा और बाद में ४थी शताब्दी मे गुप्तवंश के अधीन में कठपुतली राज्य हो गया। इस क्षेत्र मे ५वी शताब्दी के उत्तरार्ध मे आकर वैशाली के लिच्छवियो के राज्य की स्थापना हुई । ८वी शताव्दी के उत्तरार्ध मे लिच्छवि वंश का अस्त हो गया और सन् ८७९ से नेवार (नेपाल की एक जाति) युग का उदय हुआ, फिर भी इन लोगों का नियन्त्रण देशभर मे कितना बना था, इसका आकलन कर पाना मुश्किल है। ११वी शताब्दी के उत्तरार्ध मे दक्षिण भारत से आए चालुक्य साम्राज्य का प्रभाव नेपाल के दक्षिणी भूभाग मे दिखा । चालुक्यों के प्रभाव मे आकर उस समय राजाओ ने बुद्धधर्म को छोडकर हिन्दू धर्म का समर्थन किया और नेपाल मे धार्मिक परिवर्तन होने लगा।

पाटन का हिन्दू मन्दिर, तीन प्राचीन राज्य मध्येका एककी राजधानी
पाटन का हिन्दू मन्दिर, तीन प्राचीन राज्य मध्येका एककी राजधानी
१९२० की नेपाली राजशाही
१९२० की नेपाली राजशाही

१३वीं शताव्दि के पूर्वार्ध मे संस्कृत शब्द मल्ल का थर वाले वंश का उदय होने लगा। २०० वर्ष में इन राजाऔं ने शक्ति एकजुट कीा। १४वीं शताब्दी के उत्तरार्ध मे देश का बहुत ज्यादा भाग एकीकृत राज्य के अधीन में आ गया। लेकिन यह एकीकरण कम समय तक ही टिक सका: १४८२ में यह राज्य तीन भाग मे विभाजित हो गया - कान्तिपुर, ललितपुर, और भक्तपुर – जिसके बीचमे शताव्दियौं तक मेल नही हो सका।

१७६५मे, गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह ने नेपाल के छोटे छोटे बाइसे व चोबिसे राज्यके उपर चढाँइ करतेहुए एकिकृत किया, बहुत ज्यादा रक्तरंजित लडाँईयौं पश्वात उन्हौने ३ वर्ष बाद कान्तीपुर, पाटन व भादगाँउ के राजाओं को हराया और अपने राज्य का नाम गोरखा से नेपाल मे परिवर्तित किया। तथापि उन्हे कान्तिपुर विजय मे कोई युद्ध नही करना पड़ा। वास्तव में, उस समय इन्द्रजात्रा पर्व मे कान्तिपुर की सभी जनता फसल के देवता भगवान इन्द्र की पूजा और महोत्सव (जात्रा) मना रहे थे, जब पृथ्वी नारायण शाह ने अपनी सेना लेकर धावा बोला और सिंहासन कब्जा कर लिया। इस घटना को आधुनिक नेपाल का जन्म भी कहते है।

तिब्बत से हिमाली (हिमालयी) मार्ग के नियन्त्रण के लिए हुवा विवाद और उसके पश्चात युद्ध में तिब्बत की सहायता के लिए चीन के आने के बाद नेपाल पीछे हट गया। नेपाल की सीमा के नजदीक का छोटे-छोटे राज्यों को हड़पने के कारण से शुरु हुवा विवाद ब्रिटिस इस्ट इण्डिया कम्पनि के साथ दुश्मनी का कारण बना । इसी वजह से १८१४–१६ रक्तरंजित एङ्गलो-नेपाल युद्ध हो गया, जिसमे नेपाल को अपनी दो तिहाई भूभाग से हाथ धोना पड़ा लेकिन अपनी सार्वभौमसत्ता और स्वतन्त्रता कायम रखा। भारत वर्ष में यही एक खण्ड है जो कभी भी किसी बाहरी सामन्तौं (उपनिवेशों) के अधीन में नही आया। विलायत से लड्ने में पस्चिम मे सतलज से पुर्व में टिष्टा नदी तक फैला हुवा बिशाल नेपाल सुगौली सन्धि के बाद पस्चिम में महाकाली और मेची नदियों के बीच सिमट गया लेकिन अपनी स्वाधीनत को बचाए रखने में नेपाल सफल रहा, बाद मे अंग्रेजो ने १८२२ मे मेची नदी व राप्ती नदी के बीच की तराई का हिस्सा नेपाल को वापस किया उसी तरह १८६० मे राणा प्रधानमन्त्री जंगबहादुर से खुश होकर अंग्रेजो ने राप्तीनदी से माहाकाली नदी के बीच का तराई का थोडा और हिस्सा नेपाल को लौटाया । लेकिन सुगौली सन्धी के बाद नेपाल ने जमीन का बहुत बडा हिस्सा गँवा दिया यह क्षेत्र अभी उत्तराञ्चल राज्य और हिमाञ्चल प्रदेश और पञ्जाबी पहाडी राज्य मै सम्मिलित है। पूर्व मै दार्जीलिङ और उसके आसपासका नेपाली मूल के लोगों का भूमि (जो अब पश्चिम बंगाल मे है) भी ब्रिटिस इन्डिया के अधीन मे हो गया तथा नेपाल कासिक्किम के उपरका प्रभाव और शक्ति भी नेपाल को त्यागना पडा।

राज परिवार व भारदारोके विच गुटबन्दी की वजहसे युद्धके बाद अस्थायित्व कायम हुवा। शन् १८४६मा शासन कररही रानीकी सेनानायक जङ्गबहादुर राणाको पदच्युत करने षडयन्त्रकी खुलासा होनेसे कोतपर्व नामका नरसंहार हुवा। हतियारधारी सेना व रानीकेप्रति वफादार भाइ-भारदाररोकेविच मारकाट चलनेसे देशके सयौँ राजखलाक, भारदारलोग व दुसरे रजवाडो का हत्याहुवा। जङ्गबहादुरकी जितके बाद राणा खानदान उन्होने सुरुकिया व राणा शासन लागु किया। राजाको नाममात्रमे सिमित किया व प्रधानमन्त्री पदको सक्तिशाली वंशानुगत किया गया। राणाशासक पूर्णनिष्ठाके साथ ब्रिटिसके पक्षमे रहतेथे व ब्रिटिसशासकको १८५७की सेपोई रेबेल्योन (प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम), व बादमे दोनो विश्व युद्धसहयोग कियाथा। शन् १९२३मे संयुक्त अधिराज्य व नेपाल विच आधिकारिक रुपमे मित्रताकी सम्झौतामे हस्ताक्षर हुवा, जिसमे नेपलकी स्वतन्त्रता को संयुक्त अधिराज्य ने स्वीकार किया । दक्षिण एशियाई मुल्कों में पहला, नेपाली राजदुतावास ब्रिटेन की राजधानी लंडन मे खुल गया ।

१९४० दशक के उत्तरार्ध मे लोकतन्त्र-समर्थित आन्दोलनों का उदय होने लगा व राजनैतिक पार्टियां राणा शासनके विरुद्ध में हो गए। उसी समय चीन ने १९५० में तिब्बत पर कब्जा कर लिया जिसकी वजहसे बढ़ती हुई सैनिक गतिविधि को टालने के लिए भारत नेपाल की स्थायित्व पर चाख बनाने लगा । फलस्वरुप राजा त्रिभूवन को भारत ने समर्थन किया १९५१ में सत्ता लेने में सहयोग किया, नयाँ सरकार का निर्माण हो गया, जिसमें ज्यादा आन्दोलनकारी नेपाली कङ्ग्रेस पार्टि के लोगो की सहभागिता थी। राजा व सरकार के बीच वर्षों की शक्ति खींचातानी के पश्चात, १९५९मे राजा महेन्द्र ने लोकतान्त्रिक अभ्यास अन्त किया व "निर्दलिय" पञ्चायत व्यवस्था लागु करके राज किया। सन् १९८९के "जनआन्दोलन"ने राजतन्त्रको सांवैधानिक सुधार करने व बहुदलिय संसद बनाने का वातवरणा बनगया सन १९९०मा कृष्णप्रशाद भट्टराई अन्तरिम सरकारके प्रधानमन्त्री बनगए, नयाँ संविधानका निर्माण हुवा राजा बीरेन्द्र ने १९९० मे नेपालके इतिहासमे दूसरा प्रजातन्त्रिक बहुदलीय संबिधान जारी किया [४] व अन्तरिम सरकार ने संसद के लिए प्रजातान्त्रिक चुनाव करवाए । नेपाली कङ्ग्रेसल ने राष्ट्र की दुसरी प्रजातन्त्रीक चुनाव मे बहुमत प्राप्त किया व गिरिजाप्रशाद कोइराला प्रधानमन्त्री बने।

इक्कसवीं सदी की शुरुआत में नेपाल में माओवादियों का आन्दोलन तेज होता गया । मधेशियों के मुद्दे पर भी आन्दोलन हुए । अन्त में सन् 2008 में राजा ज्ञानेन्द्र ने प्रजातांत्रिक चुनाव करवाए जिसमें माओवादियों को बहुमत मिला और प्रचण्ड नेपाल के प्रधानमंत्री बने और मधेशी नेता रामबरन यादव ने राष्ट्रपति का कार्यभार सम्हाला ।

[संपादित करें] भूगोल

मुख्य लेख: नेपाल का भूगोल
नेपाल का भौगोलिक नक्शा
नेपाल का भौगोलिक नक्शा
सुक्खा हिमाली पृष्ठभूमि
सुक्खा हिमाली पृष्ठभूमि

नेपाल एक तिरछे सामानान्तर चतुर्भुज के आकार का है। नेपाल की लम्बाई करीब ८०० किलोमीटर (५०० मा) और चौड़ाई २०० किलोमीटर (१२५ मा) है। नेपाल का कुल क्षेत्रफल १४७,१८१ वर्ग किलोमिटर (५६,८२७ sq मा) है। नेपाल भौगोलिक रूप से ३ भाग में विभाजित है - हिमाली क्षेत्र, पहाड, और तराइ क्षेत्र। साथ में भित्री मधेस कहलाने वाला एक उपत्यका का समुह पाहडी क्षेत्र के महाभारत पर्वत श्रृङखला व चुरीया श्रृङखला के बिच स्थीत है । यह क्षेत्र पाहड व तराइ के बीच मे स्थित है हिमाली पहाडी व तराइ क्षेत्र पूर्व-पश्चिम दिशा मे देशभर में फैले हुए है और यिनी क्षेत्र को नेपाल के प्रमुख नदियो ने जगह जगह पर विभाजन किया है ।

भारतके साथ जुडा हुवा तराइ फांट भारतीय-गंगा समथरका उत्तरी भाग है। इस भाग की सिंचाई तथा भरण-पोषणमे तीन नदीयो का मुख्य योगदान है: कोशी, गण्डकी (भारतमे गण्डक नदी),और कर्णाली नदी। इस भूभाग की जलवायु उष्म और संतृप्त है ।

पहाडी भूभागमे १,००० लेकर ४,००० मिटरसम्मतक (३,३००–१३,१२५ फू) उचांईका पर्वत पडतेहै| इस क्षेत्रमे महाभारत लेख व सिवालिक श्रृखला (चुरिया) नामके दो पहाडी श्रृखला मुख्य श्रृखला है। पहाड क्षेत्रमे हि काठमाडौं उपत्यका, पोखरा उपत्यका सुर्खेत उपत्यका के साथ टार,बेसी,पाटन माडी कहेजाने वाले वहुतसे उपत्यका पडते है, ए उपत्यका नेपालके सबसे उर्वर भुमी है तथा काठमाडौं उपत्यका नेपालका सबसे बडा शहरी क्षेत्र हो। पहाडी क्षेत्रकी उपत्यका छोडके २,५०० मिटर (८,२०० फिट) उच्च स्थलमे जनघनत्व बहुत कम है।

हिमाली क्षेत्रमे संसारके सबसे उच्च हिमश्रृखलाह पडते है। इस क्षेत्र की उत्तर मे चीन की सीमा मे संसार का सर्वोच्च शिखर, सगरमाथा ८,८४८ मिटर (२९,०३५ फि) अवस्थित है। संसार के ८,००० मीटर से ऊँचे १४ चोंटियों मे से ८ नेपाल की हिमाली क्षेत्र में पडते है। कञ्चनजङ्घा, संसार का तीसरा सर्वोच्च शिखर भी इसी हिमाली क्षेत्र मे पडता है।

[संपादित करें] मौसम

नेपाल मे पाँच मौसमी क्षेत्र है जो उचाँईके साथ कुछ मात्रा में मेल खाते है। ट्रपिकल तथा सबट्रपिकल क्षेत्र १,२०० मिटर(३,९४० फि) से निचे, टेम्परेट क्षेत्र १,२०० लेकर २,४०० मिटर (३,९००–७,८७५ फि), ठण्डा क्षेत्र २,४०० देखि ३,६०० मिटर (७,८७५–११,८०० फि), सबआर्क्टिक क्षेत्र ३,६०० देखि ४,४०० मिटर (११,८००–१४,४०० फि), व आर्क्टिक क्षेत्र ४,४०० मिटर(१४,४०० फिट)से उपर। नेपालमे पाँच ऋतुहरु होतेहै: उष्म, मनसून, अटम, शिषिर व बसन्त। हिमालय मध्य एशिया से बहने वाली ठन्डी हवा को नेपाल के अन्दर जाने से रोकता है तथा मॉनसून की वायु का उत्तरी परिधिके रुपमे पानी काम करताहै। नेपाल व बंगलादेशकी सिमा नहि जुडताहै फिरभी एदोनो राष्ट्र २१ किलोमिटर (१३ माइल)की एक सकरी चिकेन्स् नेक (मुर्गे की गर्दन) कहे जाने वाले क्षेत्रसे अलग है । इस क्षेत ्रको स्वतन्त्र-व्यापार क्षेत्र बनाने का प्रयास हो रहा है ।

संसार का सर्वोच्च शिखर सगरमाथा (एवरेस्ट) नेपाल व तिब्बती सीमा पर अवस्थित है। इस हिमालकी नेपालमे पडनेवाले दक्षिण-पूर्वी रिज(ridge) प्राविधिक रूपमे चढ्ना सहज माना जाता है । जिसकी वजहसे हरेक वर्ष इस स्थान मे बहुत पर्यटक जाते है । अन्य चढे जाने वाले हिमशिखर मे अन्नपुर्ण (१,२,३,४) अन्नपुर्ण श्रृंखलामे पडता है।

[संपादित करें] अर्थतन्त्र

मुख्य लेख: नेपालको अर्थतन्त्र
हिमालयकी तलेमे खेति
हिमालयकी तलेमे खेति

कृषि जनसङ्ख्याकी ७६% कि रोजगारी कभर करता है और कुल ग्राह्यस्थ उत्पादनका ३९% योगदान करता है और सेवा क्षेत्र ३९% साथमे उद्योग २१% आम्दानी कभर करता है। देशकी उत्तरी दुई-तिहाई भागमे रहे पहाडी और हिमाली भूभाग सडके और पुल अन्य संरचना निर्माण करनेमे कठिन और महङ्गा बनाता है। सन् २००३ तक पिच -सडकोकी कुल लम्बाई ८,५०० किमि से कुछ जादा और दक्षिणमे रहा रेल्वे-लाइनकी कुल लम्बाई ५९ किमि मात्र है। ४८ धावनमार्ग और उनमेसे १७ पिचहोनेसे हवाईमार्गकी स्थिति बहुत अछा है। यहाँ जादामे प्रति १२ व्यक्तिके लिए १ टेलिफोन सुविधा उपल्ब्ध है; तारजडित सेवा देशभर अपुग है लेकीन सहरो और जिल्ला सदरमुकामोमे जादा केन्द्रित है; सेवामे जनताकी पहुँच बढने और सस्ता होते जानेसे मोबाइल (वा तार-रहित) सेवाकी स्थिति देशभर बहुत अछा है। सन् २००५ मे १,७५,००० इन्टरनेट जडाने (connections) थे, लेकीन "सङ्कटकाल" लागू होनेकेपश्चात कुछ समय सेवा अवरूद्ध होगया था। कुछ अन्योल बाद नेपालकी दुसरी बृहत जनआन्दोलनने राजाकी निरङ्कुश अधिकार समाप्त करनेके पश्चात सभी इन्टरनेट सेवाए बिना रोकटोक सुचारू होगएहै।[५]

नेपालकी भूपरिबेस्टित स्थिति[६] और प्राविधिक कमजोरी और लम्बा द्वन्द अर्थतन्त्रको पूर्णरूपमे विकाशशील होन नहिदिया है। नेपाल भारत, जापान, संयुक्त अधिराज्य, अमेरिका, युरोपेली संघ, चीन, स्वीजरल्याण्ड और स्क्यानडेभियन राष्ट्रोसे वैदेशिक सहयोग पाताहै। आर्थिक बर्ष २००५/०६मे सरकारकी बजेट करिब १.१५३ अर्ब अमेरिकी डलर के करिव था, लेकी कुल खर्च १.७८९ अर्ब हुवा था। १९९० दशक की बढ्ती मुद्रा स्फीति दर घटकर २.९% पहुचा है। कुछ बर्षौं से नेपाली मुद्रा रूपैयाँको भारतिय रूपैयाके साथका सटहीदर १.६ मा स्थिर राखागया है। १९९० दशकमे खुला बनायागया मुद्रा बिनिमय दर निर्धारण नीतिके कारण बिदेशी मुद्राकी कालीबजार लगभग समाप्त हो चुका है। एक दिर्घकालिन आर्थिक सम्झौताने भारतकेसँगका अछा संबन्धको सहयोग पहुचाया है।

जनता बीचका सम्पत्ति वितरण अन्य विकसित और विकासोन्मुख देशोके तुलनेमे ही है: उपरवाले १०% गृहस्थीके साथ कूल राष्ट्रिय सम्पतिका ३९.1% उपर नियन्त्रण है और निम्नतम १०% के साथ केबल २.6% मात्र।

नेपालकी १ करोड जितनेका कार्यबलमे दक्ष कामदारका कमी है। ८१% कार्यबलको कृषि, १६% सेवा, और ३% उत्पादन/कला-आधारित उद्योग रोजगारी प्रदान करताहै।

[संपादित करें] प्रशासनिक विभाजन

मुख्य लेख: नेपाल का अञ्चल

नेपाल १४ अञ्चल, ७५ जिल्ला और ५ विकास क्षेत्र में विभाजित है। प्रत्येक जिला एक निश्चित जिला प्रमुख द्वारा निर्देशित है। जिला प्रमुख का काम जिला मै विधान तथा शान्ति बहाल करना और सरकारी मंत्रालयौं के काम-काजको सहायता करना है।

नेपाल का १४ अञ्चल:
1 मेची 8 लुम्बिनी
2 कोशी 9 धवलागिरी
3 सगरमाथा 10 राप्ती
4 जनकपुर 11 कर्णाली
5 बागमती 12 भेरी
6 नारायणी 13 सेती
7 गण्डकी 14 महाकाली

[संपादित करें] संस्कृति

नेपाल की संस्कृति तिब्बत एवं भारत से मिलती जुलती है। यहाँ की वेषभूषा, भाषा तथा पकवान इत्यादि एक जैसे ही है । नेपाल का सामान्य खाना चने की दाल, भात, तरकारी, अचार है । इस प्रकार का खाना सुबह एवम् रात में दिन में दोनो जून खाया जाता है । खाने में चिवड़ा और चाय का भी चलन है । मांस मछली तथा अंडा भी खाया जाता है । हिमालयी भाग में गेहूँ, मकई , कोदो, आलु आदि का खाना और तराई में गेहूँ की रोटी का प्रचलन है । कोदो के मादक पदार्थ तोङ्गबा, छ्याङ, रक्सी आदि का सेवन हिमालयी भाग में बहुत होता है । नेवार समुदाय अपने विशेष किस्म के नेवारी परिकारों का सेवन करते हैं।

[संपादित करें] शिक्षा

नेपालमे आधुनिक शिक्षा की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंग बाहदुर राणा की बेलायत (विदेश) यात्रा के बाद सन् 1982 में स्थापित दरबार हाइस्कुल (हाल रानीपोखरी किनारे अवस्थित भानु मा.बि। ) हुवा था, इससे पहले नेपालमे कुछ धर्मशास्त्रीय दर्शन पर आधारित शिक्षा मात्र दी जाती थी । आधुनिक शिक्षा की शुरूवात 1982 में होते हुवे भी यह आम नेपाली जनताके लिए सर्वशुलभ नहीथा । लेकिन देशके बिभिन्न भागमे कुछ बिधालय दरवार हाइस्कुलकी शुरूवात के बाद खुलना शुरू हुए । लेकीन नेपालमे पहिला उच्च शिक्षा केन्द्र काठमान्डौमे राहहुवा त्रिचन्द्र क्याम्पस है । राणा प्रधानमन्त्री चन्द्र सम्सेर ने अपने साथ राजा त्रिभुवनका नाम जोडके इस क्याम्पसका नाम राखाथा । यह क्याम्पसके स्थापना बाद नेपालमे उच्च शिक्षा आर्जन बहुत सहज होगयाथता लेकीन सन 1959 तक भि देश मे एकभी विश्वविधालय स्थापना हो नही सकाथा राजनितीक परिवर्तन पस्चात राणा शासन मुक्त देशने अन्तत 1959मे त्रिभुवन विश्वविधालयकी स्थापना किया ।उसकेबाद महेन्द्र संस्कृतके साथ अन्य विश्वविधालय खुलते गए । हालहीमे मात्र सरकारने ४ थप विश्वविधालय भि स्थापना करनेका घोषणा किया है । नेपालकी शिक्षा का सबसे मुख्य योजनाकार शिक्षामन्त्रालय है उसके इलावा शिक्षा विभाग, पाँच क्षेत्रीय शिक्षा निर्देसनालय, पचहतर जिल्ला शिक्षा कार्यालय, परिक्षा नियन्त्रण कार्यालय सानोठिमी, उच्चमाध्यामीक शिक्षा परिषद,पाठ्यक्रम बिकास केन्द्र, बिभिन्न विश्वविधालयके परिक्षा नियन्त्रण कार्यलय लगायत नेपालकी शिक्षाका बिकास बिश्तार तथा नियन्त्रणके क्षेत्रमा कार्यरत है हरू समेत रहेका छ

[संपादित करें] नेपालके विश्वविधालय

  1. त्रिभुवन विश्वविधालय
  2. महेन्द्र संस्कृत विश्वविधालय (हाल नेपाल संस्कृत बनायागाया है )

'#काठमाडौं विश्वविधालय'

  1. पुर्वान्चल विश्वविधालय
  2. पोखरा विश्वविधालय
  3. लुम्वीनी विश्वविधालय
  4. नेपाल कृषी तथा वन विश्वविधालय
  5. मध्यपस्चिमाञ्चल विश्वविधालय
  6. सुदुरपस्चीमाञ्चल विश्वविधालय
  7. खुल्ला विश्वविधालय

[संपादित करें] स्वास्थ्य

नेपाल मे बहुत पहिले से आयुर्वेद (प्राकृतिक चिकित्सा) पद्धती उपयोगमे था बैध और परंपरागत चिकित्सक गाँवघर और शहरो मे स्वास्थ्य सेवा पहुचाते थे । उनलोगो की औषधि के श्रोत नेपाल के हिमाल से तराइ तक मिलनेवाले जडीबुटी ही होते थे । आधुनिक चिकित्सा पद्धती की शुरूवात राणा प्रधानमन्त्री जंगवाहादुर राणा की बेलायत यात्रा के बाद दरवार के अन्दर शुरू हुवा लेकिन नेपाल में आधुनिक चिकित्सा संस्था के रूप में राणा प्रधानमन्त्री वीर सम्सेर के काल मे काठामाण्डौ में सन १८८९ मे स्थापित वीर अस्पताल ही है । तत्पश्चात चन्द्र समसेर के काल मे स्थापित त्रिचन्द्र सैनिक अस्पताल है । हाल में नेपाल के हस्पताल सामन्यतया आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा आधुनिक चिकीत्सा करके सरकारी सेवा विद्यमान हे ।

[संपादित करें] सेना तथा सुरक्षा अंग

नेपालमे नेपाली सेना,नेपाली सैनिक विमान सेवा,नेपाल ससस्त्र प्रहरी बल,नेपाल प्रहरी,नेपाल ससस्त्र वनरक्षक तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग नेपाल लगायत सस्सत्र, तथा गुप्तचर सुरक्षा निकाय रहेहै ।

[संपादित करें] संदर्भ

  1. अंतरिम संविधान के अनुसार नेपाली एकमात्र राजभाषा है (आर्टिकिल ५, पैरा २), नेपाल मे बोली जानेवाली अन्य भाष नेपाल की राष्ट्रीय भाषायें हैं। (आर्टक्ल ५, पैरा १) [1]
  2. नेपालको अन्तरिम संविधान २०६३
  3. A Country Study: NepalFederal Research Division, Library of Congress। अभिगमन तिथि: September 23, 2005
  4. Timeline: NepalBBC News। अभिगमन तिथि: September 29, 2005।
  5. NepalCIA World Factbook। अभिगमन तिथि: सेप्टेम्बर २३, २००५।
  6. Nepal: EconomyMSN Encarta। अभिगमन तिथि: September 23, 2005

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

[संपादित करें] समाचार