होली लोकगीत

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ग्रामीण लोकगायक
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होली उत्तर भारत का एक लोकप्रिय लोकगीत है। इसमें होली खेलने का वर्णन होता है। यह हिंदी के अतिरिक्त राजस्थानी, पहाड़ी, बिहारी, बंगाली आदि अनेक प्रदेशों की अनेक बोलियों में गाया जाता है। इसमें देवी देवताओं के होली खेलने से अलग अलग शहरों में लोगों के होली खेलने का वर्णन होता है। देवी देवताओं में राधा-कृष्ण, राम-सीता और शिव के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं।[१] इसके अतिरिक्त होली की विभिन्न रस्मों की वर्णन भी होली में मिलता है।[२]

इस लोकगीत को शास्त्रीय या उप-शास्त्रीय संगीत में ध्रुपद, धमार, ठुमरी या चैती के रूप में भी गाया जाता है।

[संपादित करें] संदर्भ

  1. लोकगीतों में देवी-देवताओं की होली (एचटीएम)। अभिव्यक्ति। अभिगमन तिथि: 19 मार्च, 2008
  2. दे दे बुलउवा राधे को : छत्‍तीसगढ में फाग। आरंभ। अभिगमन तिथि: 18 मार्च, 2008